Best Akhbar Poem | Poetry| Kavita 2024 in Hindi| अखबार पर बेहतरीन हिंदी कविता

 अखबार पर बेहतरीन हिंदी कविता

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अखबार संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है जो हमें रोज़मर्रा की दुनिया की जानकारी देता है। यह हमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार, खेल, मनोरंजन, विज्ञान, तकनीक, व्यापार, राजनीति और कई अन्य विषयों पर जानकारी प्रदान करता है। आजकल, विभिन्न भाषाओं में  भी अनेक अखबार उपलब्ध हैं। Best Akhbar Poem | Poetry| Kavita 2024 in Hindi| अखबार पर बेहतरीन हिंदी कविता आपको बहुत रोचक लगेगी, हमें पूर्ण विश्वास है।



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अखबार पर खूबसूरत कविता|Best Poem on Newspaper


सुबह होते ही खबरों से प्यार शुरू हो जाता है
हर घर में चाय के साथ अखबार शुरू हो जाता है।


राजनीति की चर्चाओं से गरमा- गरम यह रहते हैं
बेकारी- गरीबी जैसे मुद्दों का भंडार शुरू हो जाता है।


अर्थव्यवस्था वाला कॉलम घटता-बढ़ता रहता है
रुपया-डॉलर की घटा-बढ़ी का कारोबार शुरू हो जाता है।


दुर्घटना ,मर्डर, रेप खबर सुन मन विचलित हो जाता है
कुछ पर तूल पकड़ नेताओं में हाहाकार शुरू हो जाता है।


वैवाहिक विज्ञापन तो जैसे भूले -भटके लगते हैं
पर वर- वधू के संगम का प्रवेश- द्वार शुरू हो जाता है।


मनोरंजन वाले पन्ने जैसे पांव पसारे बैठे हैं
हॉलीवुड- बॉलीवुड का मानो व्यापार शुरू हो जाता है।


इश्तिहार भी जगह ढूंढता और मचलता छपने को
हफ्तों से बाट निहार रहा, नित दरकार शुरू हो जाता है।


खेल-जगत का पन्ना भी अपना परचम लहराता है
जीते तो उपहार नहीं तो उपचार शुरू हो जाता है।


लोकतंत्र की मर्यादा इससे ही पहचानी जाती है
देश की ताकत का अंदाजा सीमा पार शुरू हो जाता है।

                                          .......'अनु-प्रिया'
 

Akhbar Per Best Poem/ Poetry/ Kavita

Best Poem on Newspaper

एक अखबार में सामान्यतया विभिन्न खंड होते हैं, जैसे कि मुख्य समाचार, राजनीति, खेल, विज्ञान और तकनीक, व्यापार, मनोरंजन, साहित्य, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि । अखबार की इन्हीं विशेषताओं को कविता के माध्यम से आपके समक्ष रखा गया है। हमें आशा है कि आपको यह कविता अवश्य पसंद आएगी।


Subah hote hii khabaron se pyaar shuruu ho jaataa hai
Har ghar men chaay ke saath akhabaar shuruu ho jaataa hai.



Raajaniiti kii charchaaon se garamaa- garam yah rahate hain
Bekaarii- gariibii jaise muddon kaa bhanḍaar shuruu ho jaataa hai.



Arthavyavasthaa vaalaa kaalam ghaṭataa-badhataa rahataa hai
Rupayaa-ḍollar kii ghaṭaa-badhii kaa kaarobaar shuruu ho jaataa hai.



Durghaṭanaa ,marḍar, rep khabar sun man vichalit ho jaataa hai
Kuchh par tuul pakad netaaon men haahaakaar shuruu ho jaataa hai.



Vaivaahik vijñaapan to jaise bhuule -bhaṭake lagate hain
Par var- vadhuu ke sangam kaa pravesh- dvaar shuruu ho jaataa hai.



Manoranjan vaale panne jaise paanv pasaare baiṭhe hain
Haaliivuḍ- baaliivuḍ kaa maano vyaapaar shuruu ho jaataa hai.



Ishtihaar bhii jagah ḍhuunḍhataa owr machalataa chhapane ko
haphton se baaṭ nihaar rahaa, nit darakaar shuruu ho jaataa hai.



Khel-jagat kaa pannaa bhii apanaa paracham laharaataa hai
Jiite to upahaar nahiin to upachaar shuruu ho jaataa hai.



Lokatantra kii maryaadaa isase hii pahachaanii jaatii hai
Desh kii taakat kaa andaajaa siimaa paar shuruu ho jaataa hai.

                               .......'Anu-priya'



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