भगवान पर कविता हिंदी में | Best Poem on God in Hindi 2024 | ईश्वर पर बेहतरीन कविता



जब कभी-कभी हम असमंजस में पड़ जाते हैं कि भगवान है कि नहीं है, क्योंकि कभी-कभी हमें बहुत अच्छे कर्म करने के बावजूद भी फल अच्छा नहीं मिलता तब हमारे मन को बहुत ठेस लगती है और लगता है कि इस दुनिया में धर्म , ईश्वर जैसा कुछ भी नहीं है। इन्हीं भावों को इस कविता में उतारने की कोशिश की गई है। आशा है आपको अनुप्रिया द्वारा लिखित यह कविता भगवान पर कविता | Poem on God in Hindi 2024-"राह गलत या गलत कहीं मैं" अवश्य पसंद आएगी।




भगवान पर कविता  हिंदी में 
Best Poem on God in Hindi 2024


ईश्वर की भक्ति एक साधना है जो मन, शरीर और आत्मा को संयोग में लाती है। यह एक ऊर्जा की अनुभूति है जो हमें सकारात्मकता, शांति और प्रेम की ओर आकर्षित करती है। 





ईश्वर की भक्ति पर बेहतरीन हिंदी कविता | Bhagwan Bhakti Special Kavita-Anupriya


ईश्वर भक्ति पर हिंदी कविता
भगवान पर कविता-


राह गलत या गलत कहीं मैं



मेरा अंतर्मन विचलित है,
तेरे होने ,न होने में।
राह गलत या गलत कहीं मैं,
तुझे पाने, तेरी होने में।।


जब तक सबसे अनजान थी मैं
लगता कि तुम मेरे अंदर थे
झांका जब दुनिया में जाकर
तुम मंदिर-मस्जिद अंदर थे
क्यों आंख मिचौली करते हो?
क्या मजा है छिपने- खोने में!
राह गलत या गलत कहीं मैं
तुझे पाने,तेरी होने में।।


चिंगारी बड़ी मजहबी हैं
तुम्हें राम-रहीम बनाने को
कोई मूर्ति में गढ़ता है तुमको
कोई फूल मजार चढ़ाने को
क्यों प्रगट नहीं होते हो तुम?
बड़े शातिर हो खेल- खिलाने में!
राह गलत या गलत कहीं मैं
तुझे पाने, तेरी होने में।।


घंटी शंखों से बुला रहा
कोई बुला रहा आजानों से
क्यों पत्थर बनकर बैठे हो?
क्या रहते हो तहखानों में!
बस एक सवाल मेरा सुन लो
क्यों रहते हरदम सोने में?
राह गलत या गलत कहीं मैं
तुझे पाने ,तेरी होने में।।

                              ...... 'अनु-प्रिया'


***


thank you god poem in hindi 


ईश्वर की भक्ति विभिन्न रूपों में व्यक्त हो सकती है, जैसे पूजा, प्रार्थना, ध्यान, सत्संग और धर्म के अनुसार आचरण। यह हमें सच्चे सुख, आनंद और शांति का अनुभव कराती है, चाहे हम व्यस्त जीवन में हों या कठिनाइयों का सामना कर रहे हों।


Hindi Poem on God 
(ईश्वर पर कविता)



Raah galat ya galat kahin mai



meraa amtarman vichalit hai,
tere hone ,n hone men.
raah galat yaa galat kahiin main,
tujhe paane, terii hone men..


jab tak sabase anajaan thii main
lagataa ki tum mere andar the
jhaankaa jab duniyaa men jaakar
tum mandir-masjid andar the
kyon aankh michowlii karate ho?
kyaa majaa hai chhipane- khone men!
raah galat yaa galat kahiin main
tujhe paane,terii hone men..


chingaarii badii majahabii hain
tumhen raam-rahiim banaane ko
koii muurti men gadhataa hai tumako
koii phuul majaar chadhaane ko
kyon pragaṭ nahiin hote ho tum?
bade shaatir ho khel- khilaane men!
raah galat yaa galat kahiin main
tujhe paane, terii hone men..


ghanṭii shankhon se bulaa rahaa
koii bulaa rahaa aajaanon se
kyon patthar banakar baiṭhe ho?
kyaa rahate ho tahakhaanon men!
bas ek savaal meraa sun lo
kyon rahate haradam sone men?
raah galat yaa galat kahiin main
tujhe paane ,terii hone men..

                              ...... 'Anu-priya'

***


भगवान के प्रति आदर, आत्म-समर्पण और निःस्वार्थ भावना के माध्यम से हम ईश्वर के साथ एकता महसूस करते हैं। कभी-कभी भक्ति कविताओं को पढ़कर भी ईश्वर के साथ जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।



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