Motivational Poem in Hindi 2023 | प्रेरणा देने वाली कविता


जीवन सर्वशक्तिमान भगवान द्वारा दिया गया अमूल्य उपहार है। यह एक ऐसी चुनौती भरी यात्रा है जिसमें प्रत्येक प्राणी हर्ष-शोक, प्यार-घृणा, दुख-सुख, सफलता- असफलता जैसी स्थितियों का सामना करता ही है। जिस प्रकार पर पतझड़ का मतलब पेड़ का अंत होना नहीं होता उसी प्रकार असफलता का अर्थ भी जीवन की समाप्ति नहीं है। जिस प्रकार सही समय पर सही बीज लगाने से वृक्ष फल-फूल देते हैं, उसी प्रकार सही दिशा में सही प्रयास करने पर मानव भी कभी न कभी अवश्य सफल हो जाता है। इसी भाव को अनुप्रिया द्वारा लिखित Motivational Poem in Hindi 2023 | प्रेरणा देने वाली कविता -किसका कसूर? में अनोखे ढंग से प्रस्तुत किया गया है। आशा है आप सभी को इस कविता में  अवश्य ही नयापन लगेगा।



Motivational Poem in Hindi 2023 | प्रेरणा देने वाली कविता 

किसका कसूर?

('अनु-प्रिया' द्वारा लिखित)



Motivational Poem in Hindi 2023 | प्रेरणा देने वाली कविता


Best Motivational Hindi poem

प्रेरणा देने वाली हिंदी कविता : 

किसका कसूर?


मेरा लगाया पौधा बार-बार मुरझा जाता है
सूख जाता है
मानो अठखेलियां करता हो
और मुस्कुराकर कहता हो कि......


तुम आज हो, कल ना होगे
क्षणभंगुर है तेरा अस्तित्व
सपना भी तेरा उधारी का
अपनी जिंदगी तक पर नहीं तेरा स्वामित्व।


आती-जाती दुनिया के
जीते-जागते खिलौने तुम
तुमसे ही सारा जमाना है।
भ्रम के पर्दे में जीते तुम।


कभी ठोकर खाकर संभलोगे
कभी जख्मी होगे आहों से
दिल तड़प-तड़प कराहेगा
जब भटकोगे चौराहों में। 


मंद पड़ोगे बंद घड़ी से जब
छिन जाएगा जो भी संजोया अब तक
मिलेगा सूत समेत वही कटकर
जो पहले तुमने बोया जाकर।


हर रोज नया पन्ना जुड़ता
कई पन्ने कटते जिल्दों से
कभी धूप,कभी छाया पड़ती
पोथी जिंदगी-परिंदों पे‌।


घबराकर चंद खरोचों से बस
मचने न देना उथल-पुथल
तुम सख्त हो प्राणी वसुधा के
पर बसने देना मन- मलमल।


तेरा खून-पसीना महकेगा जब
खुशबू तर हो जाएगी धरा
कण-कण में चहक भरेगी तब
मुझ जैसा पौधा भी लहरेगा।


चल कर रुकना,फिर से चलना
जीवन का यही दस्तूर है
करम सही ,बस करते जाना 
सोचे बिना कि किसका कसूर है।
सोचे बिना कि किसका कसूर है।।

                                  .......'अनु-प्रिया'


Best Motivational Poem in Hindi


नई प्रेरणात्मक हिंदी कविता

Kiska Kasoor

meraa lagaayaa powdhaa baar-baar murajhaa jaataa hai
suukh jaataa hai
maano aṭhakheliyaan karataa ho
owr muskuraakar kahataa ho ki......


tum aaj ho, kal naa hoge
kshaṇabhangur hai teraa astitv
sapanaa bhii teraa udhaarii kaa
apanii jindagii tak par nahiin teraa svaamitva.


aatii-jaatii duniyaa ke
jiite-jaagate khilowne tum
tumase hii saaraa jamaanaa hai.
bhram ke parde men jiite tuma.


kabhii ṭhokar khaakar sambhaloge
kabhii jakhmii hoge aahon se
dil tadap-tadap karaahegaa
jab bhaṭakoge chowraahon men. 


mand padoge band ghadii se jab
chhin jaaegaa jo bhii sanjoyaa ab tak
milegaa suut samet vahii kaṭakar
jo pahale tumane boyaa jaakara.


har roj nayaa pannaa judataa
kaii panne kaṭate jildon se
kabhii dhuup,kabhii chhaayaa padatii
pothii jindagii-parindon pe‌.


ghabaraakar chand kharochon se bas
machane n denaa uthal-puthal
tum sakht ho praaṇii vasudhaa ke
par basane denaa man- malamala.


teraa khuun-pasiinaa mahakegaa jab
khushabuu tar ho jaaegii dharaa
kaṇ-kaṇ men chahak bharegii tab
mujh jaisaa powdhaa bhii laharegaa.


chal kar rukanaa,phir se chalanaa
jiivan kaa yahii dastuur hai
karam sahii ,bas karate jaanaa
soche binaa ki kisakaa kasuur hai.
soche binaa ki kisakaa kasuur hai..

                                    ....... 'Anu-priya'

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