लिव इन रिलेशनशिप पर विशेष कविता | Poem on Live-in-Relationship - 35 टुकड़े



लिव इन रिलेशनशिप को आसान भाषा में  दो व्यस्कों का अपनी मर्जी से बिना शादी किए एक छत के नीचे साथ रहना कह सकते हैं। दोनों पार्टनरों के लिए स्वतंत्रता और संबंधों के साझेदारी का एक प्रकार हो सकता है।कई कपल इसलिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, ताकि यह तय कर सकें कि दोनों भविष्य में साथ रह सकते हैं कि नहीं। कुछ इसलिए रहते हैं क्योंकि उन्हें पारंपरिक विवाह व्यवस्था कोई दिलचस्पी नहीं होती है। यह संबंध उत्कृष्ट अनुभवों के साथ समृद्ध हो सकता है, लेकिन साथ ही संघर्षों और अस्थिरता को भी जन्म दे सकता है। लिव इन रिलेशनशिप की कुछ कमियों को इस कविता के माध्यम से उजागर किया गया है। आशा है कि यह कविता आप सभी के मन को छू लेगी।


लिव इन रिलेशनशिप पर विशेष कविता | Poem on Live-in-Relationship - 35 टुकड़े





लिव इन रिलेशनशिप पर विशेष कविता | Poem on Live-in-Relationship - 35 टुकड़े


तन समर्पित, पर मन विचलित, ये सब प्रचलित हो गया
कुछ ठगा सा, कुछ लुटा सा, जग अचंभित हो गया
रिलेशन में रहते - रहते पहले लव हो जाता था
लिव इन रिलेशनशिप में आकर लव कलंकित हो गया




संस्कार था, मिलन था पहले जिसको परिणयोत्सव कहते थे
होता था परिवार सम्मिलित, सुख-दुख संग-संग
सहते थे
बलखाते हिलकोर मारते दिल पुलकित हो जाता था 
नई पीढ़ी के नखरों से सारा नियम विवर्जित हो गया ।
लिव इन...........



ढोल मंजीरा ज्यों-ज्यों बजते, त्यों-त्यों रिश्ते बुनते थे
तबले की थापों पर सजकर सुर सितार के बहते थे
शहनाई की गूंजों से समूचा जग टंकित हो जाता था
बदल रही रस्मों को देख के मन आशंकित हो गया
लिव इन..........




परिणय के साक्षी बनते थे गौरीशंकर देवगण
अंगीकार हृदय करते थे तब जुड़ता था गठबंधन
संकल्पों से प्रीत रीत सब कुछ अंकित हो जाता था
सीमाओं को लांघ के जोड़ा खुद में चुंबकित हो गया
लिव इन........
 



35 टुकड़ों में बंट जाती आज किसी की लाडली
किसी के सपने चूर हो गए किसी की खुलती बाटली 
धुआं साजिशों का उठने पर  ही जनसमूह गठित हो जाता था
हाहाकारी खबरों को सुन जन-गण का मन आतंकित हो गया।
लिव इन........


 
35 टुकड़े परंपरा के हो गए चकनाचूर कर
आंधी बन उड़ चली हैं नस्लें वर्तमान को लांघकर
संवेदना से कर्तव्यों का रूप प्रतिष्ठित हो जाता था
आज का मानव दानव से भी कुछ ज्यादा कुंठित हो गया
लिव इन..........




आज पलट दो नवयुवकों इस भोगवाद की आंधी को
हे लाड़लियों यही थाम लो अपनी इस आजादी को
वो चिराग बन जिससे देश का हर कोना आलोकित हो जाता था
अमल करोगे मैं समझूंगी लिखना मेरा फलित हो गया
लिव इन.........

                                  ...... 'अनु-प्रिया'

आज की कविता

आज की बहन बेटियों के लिए  प्रेरणात्मक कविता

35 tukde 

tan samarpit, par man vichalit, ye sab prachalit ho gaya
kuch ṭhaga sa, kuch luṭa sa, jag achambhit ho gaya
relation me rahate - rahate pahale love ho jaata tha
live in relationship me aakar love kalankit ho gaya




sanskar tha, milan tha pahale jisako pariṇayotsav kahate the
hota tha parivaar sammilit, sukh-dukh sang-sang
sahate the
bal khaate hilakor maarte dil pulakit ho jaata tha 
nai piidhi ke nakharon se sara niyam vivarjit ho gaya .
live in..........




ḍhol manjira jyon-jyon bajate, tyon-tyon rishte bunate the
tabale kii thaapon par sajakar sur sitaar ke bahate the
shahanaaii kii guunjon se samucha jag ṭankit ho jaata tha
badal rahi rasmon ko dekh ke man aashankit ho gaya
live in.........




pariṇay ke saakshi banate the gauri-shankar devagaṇ
angikar hṛday karate the tab judata tha gaṭhabandhan
sankalpon se preet- reet sab kuch ankit ho jaata tha
simaaon ko laangh ke joda khud men chumbakit ho gaya
live in.......
 




35 ṭukadon men banṭ jaati aaj kisi ki laaḍali
kisi ke sapne chur ho gae kisi ki khulati baaṭalii 
dhuan saajishon ka uṭhane par hi jan-samuuh gaṭhit ho jaata tha
haahaakari khabaron ko sun jan-gaṇ ka man aatankit ho gaya.
live in........




35 ṭukade paramparaa ke ho gaye chakanaachur kar
aandhi ban ud chali hain naslen vartamaan ko laanghakar
samvedanaa se kartavyon kaa roop pratishṭhit ho jaata tha
aaj kaa maanav daanav se bhi kuch jyaada kunṭhit ho gaya
live in..........



aaj palaṭ do navayuvakon is bhogavaad kii aandhi ko
he laadaliyon yahii thaam lo apanii is aajadi ko
vo chiraag ban jisse desh ka har kona aalokit ho jaata tha
amal karoge main samajhungi likhna mera phalit ho gaya
live in........

                                  ...... 'Anu-priya'

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