Table of Contents
- •Best Hindi poem on Poverty
- •हाय गरीबी (गरीबी पर दिल छू लेने वाली कविता)
- •New Hindi Kavita on Life (जिंदगी पर खूबसूरत हिंदी कविता)
- •A beautiful poem on life – किसका कसूर
- •Patriotic Poem in Hindi for students
- •15 August पर देशभक्ति कविता-उठो सैनिकों
- •Heart touching poem in Hindi / Best motivational kavita in Hindi
- •प्रेरणादायक प्रसिद्ध हिंदी कविता
- •Best motivational Poem for students- कुछ कर दिखाऊंगी
- •Emotional Poem in Hindi
- •दिल छू लेने वाली कविता हिंदी में (Best Hindi poem on childhood)
- •बचपन की यादों पर कविता (चलो टहल आते हैं)
- •Hindi Kavita for new Generation | नई पीढ़ी के बच्चों के लिए प्रेरणादायक कविता
- •Poem on Live-in-Relationship | लिव इन रिलेशनशिप पर विशेष कविता
- •Best Hindi Kavita on life – जिंदगी पर कविता
- •Poem on Change in Life – परिवर्तन
- •A Beautiful Poem on city in Hindi
- •शहर पर कविता- मेरे शहर में
- •Love Kavita in Hindi (प्यार पर बहुत ही खूबसूरत कविता हिंदी में)
- •A Beautiful Love letter poem in Hindi
- •प्यार की चिट्ठी पर कविता (पूछती है )
- •A very Short Poem in Hindi
- •A VeryShort poem on corona virus
- •कोरोनावायरस पर हिंदी कविता (सवाल उठा नहीं करते)
शब्दों की खूबसूरत दुनिया में Hindi Mein Kavita: 10 बेहतरीन हिंदी कविताएँ जो दिल को छू जाएँ एक ऐसा खास संग्रह है, जो आपके दिल की भावनाओं को छूने और मन को सुकून देने का प्रयास करता है। यहाँ आपको प्रेम, जीवन, प्रकृति, रिश्तों और प्रेरणा से जुड़ी ऐसी सुंदर कविताएँ पढ़ने को मिलेंगी, जो आपके विचारों को नई दिशा देंगी और आपके हृदय में एक खास जगह बना लेंगी।हर कविता अपने अंदर अनगिनत भावनाएँ और गहरे संदेश छुपाए है।
इस संग्रह में शामिल ये चुनिंदा हिंदी कविताएँ आपको कभी मुस्कुराने का मौका देंगी, तो कभी जीवन की सच्चाइयों को समझने की प्रेरणा देंगी। यह कविता संग्रह हर उम्र के पाठकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा। इस लेख में हम अनु-प्रिया की सर्वश्रेष्ठ कविताओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे और जानेंगे कि कैसे ये रचनाएं हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं।
Best Hindi poem on Poverty
गरीबी एक ऐसी दु:खद दशा है जो अनगिनत लोगो को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से परेशान करती है। गरीबी के कारण लोगों को खाना,पर्याप्त वस्त्र, आवास, शिक्षा, और स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में बड़ी असुविधा होती है । गरीबों की इस दयनीय दिशा का चित्रण इस कविता के माध्यम से करने का प्रयास किया गया है।
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हाय गरीबी (गरीबी पर दिल छू लेने वाली कविता)

हाय गरीबी! तू क्यों न टले?
दुखियों की मड़ई से क्यों न हिले?
दुखियों की मड़ई से क्यों न हिले?
चूनीं दीवारों की धूल फांक
सुन उफनाते नाले का घर्घर नाद
चूं रहे आंसू छप्पर तले।।
हाय गरीबी! तू क्यों न टले?
सुन उफनाते नाले का घर्घर नाद
चूं रहे आंसू छप्पर तले।।
हाय गरीबी! तू क्यों न टले?
बस्ती मलिन सी,मैले से जन
पपड़ी पड़े होंठ,झुर्री पड़े तन
झुलस गए स्वप्नबीज, आंखों में पले।।
हाय गरीबी! तू क्यों ना टले?
पपड़ी पड़े होंठ,झुर्री पड़े तन
झुलस गए स्वप्नबीज, आंखों में पले।।
हाय गरीबी! तू क्यों ना टले?
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तिरस्कृत विष पी सहता बचपन
हिकारती नजरों से सहमा यौवन
सांझ ,ऐसे झोंपड़ों की क्यों ना ढले।।
हाय गरीबी ! तू क्यों ना टलें?
हिकारती नजरों से सहमा यौवन
सांझ ,ऐसे झोंपड़ों की क्यों ना ढले।।
हाय गरीबी ! तू क्यों ना टलें?
……. ‘अनु-प्रिया’
New Hindi Kavita on Life (जिंदगी पर खूबसूरत हिंदी कविता)
जिंदगी में कुछ बनने के लिए व्यक्ति को निरंतर सीखने की भावना और उत्साह बनाए रखना होता है। विफलता का सामना करने के बावजूद हार नहीं माननी होती है, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ना होता है। कुछ अच्छा करना हमें आनंद और संतोष की अनुभूति तो देता ही है, साथ ही दुनिया को भी अच्छा बनाने में हमारी मदद करता है।
A beautiful poem on life – किसका कसूर

मेरा लगाया पौधा बार-बार मुरझा जाता है
सूख जाता है
मानो अठखेलियां करता हो
और मुस्कुराकर कहता हो कि……
सूख जाता है
मानो अठखेलियां करता हो
और मुस्कुराकर कहता हो कि……
तुम आज हो, कल ना होगे
क्षणभंगुर है तेरा अस्तित्व
सपना भी तेरा उधारी का
अपनी जिंदगी तक पर नहीं तेरा स्वामित्व।
क्षणभंगुर है तेरा अस्तित्व
सपना भी तेरा उधारी का
अपनी जिंदगी तक पर नहीं तेरा स्वामित्व।
आती-जाती दुनिया के
जीते-जागते खिलौने तुम
तुमसे ही सारा जमाना है।
भ्रम के पर्दे में जीते तुम।
जीते-जागते खिलौने तुम
तुमसे ही सारा जमाना है।
भ्रम के पर्दे में जीते तुम।
कभी ठोकर खाकर संभलोगे
कभी जख्मी होगे आहों से
दिल तड़प-तड़प कराहेगा
जब भटकोगे चौराहों में।
कभी जख्मी होगे आहों से
दिल तड़प-तड़प कराहेगा
जब भटकोगे चौराहों में।
मंद पड़ोगे बंद घड़ी से जब
छिन जाएगा जो भी संजोया अब तक
मिलेगा सूत समेत वही कटकर
जो पहले तुमने बोया जाकर।
छिन जाएगा जो भी संजोया अब तक
मिलेगा सूत समेत वही कटकर
जो पहले तुमने बोया जाकर।
हर रोज नया पन्ना जुड़ता
कई पन्ने कटते जिल्दों से
कभी धूप,कभी छाया पड़ती
पोथी जिंदगी-परिंदों पे।
कई पन्ने कटते जिल्दों से
कभी धूप,कभी छाया पड़ती
पोथी जिंदगी-परिंदों पे।
घबराकर चंद खरोचों से बस
मचने न देना उथल-पुथल
तुम सख्त हो प्राणी वसुधा के
पर बसने देना मन- मलमल।
मचने न देना उथल-पुथल
तुम सख्त हो प्राणी वसुधा के
पर बसने देना मन- मलमल।
तेरा खून-पसीना महकेगा जब
खुशबू तर हो जाएगी धरा
कण-कण में चहक भरेगी तब
मुझ जैसा पौधा भी लहरेगा।
खुशबू तर हो जाएगी धरा
कण-कण में चहक भरेगी तब
मुझ जैसा पौधा भी लहरेगा।
चल कर रुकना,फिर से चलना
जीवन का यही दस्तूर है
करम सही ,बस करते जाना
सोचे बिना कि किसका कसूर है।
सोचे बिना कि किसका कसूर है।।
जीवन का यही दस्तूर है
करम सही ,बस करते जाना
सोचे बिना कि किसका कसूर है।
सोचे बिना कि किसका कसूर है।।
…….’अनु-प्रिया’
Patriotic Poem in Hindi for students
हमारे देश के वीर सैनिक अपने जीवन की खुशियों को त्यागकर हमारी सुरक्षा और सुख-शांति की रक्षा के लिए सीमाओं पर, बर्फीले पहाड़ों में, जंगलों में या समुद्र के किनारे पर हमेशा डटे रहते हैं । उनका साहस और पराक्रम हमेशा हमें आत्मविश्वास दिलाता है कि हम पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण के लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए। यह कविता सैनिकों में जोश भरने के लिए रची गई है। आशा है, हमारे सैनिक भाइयों को अवश्य पसंद आएगी।
15 August पर देशभक्ति कविता-उठो सैनिकों

उठो सैनिको!आज तिरंगा
फिर तुमको लहराना होगा
कफन बांधकर सिर पर अपने
मिट्टी का कर्ज निभाना होगा।
फिर तुमको लहराना होगा
कफन बांधकर सिर पर अपने
मिट्टी का कर्ज निभाना होगा।
कितनों ने शीश कटाए हैं
पर हार कभी ना मानी है
वे अडिग रहे उस मंजिल पर
जो मन में करके ठानी है
सेवा में, वतन- परस्ती में
अब अपनी जान लुटानी है
छलनी हो जाए सीना चाहे
इज्जत नहीं गंवानी है
लहू का एक-एक कतरा तुमको
फिर से आज बहाना होगा
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
पर हार कभी ना मानी है
वे अडिग रहे उस मंजिल पर
जो मन में करके ठानी है
सेवा में, वतन- परस्ती में
अब अपनी जान लुटानी है
छलनी हो जाए सीना चाहे
इज्जत नहीं गंवानी है
लहू का एक-एक कतरा तुमको
फिर से आज बहाना होगा
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
अपनी मां, बेटी, पत्नी की
आंखों में हरदम पानी है
पर धरती मां की खातिर उसने
दे दी जिंदगानी है
वीर शिवा-राणा की गाथा
फिर से तुमको गानी है
तुमसे ही महफूज धरा अब
तुमसे नयी कहानी है
देश के बच्चे- बच्चे को अब
भगत -सुभाष बनाना होगा
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
आंखों में हरदम पानी है
पर धरती मां की खातिर उसने
दे दी जिंदगानी है
वीर शिवा-राणा की गाथा
फिर से तुमको गानी है
तुमसे ही महफूज धरा अब
तुमसे नयी कहानी है
देश के बच्चे- बच्चे को अब
भगत -सुभाष बनाना होगा
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
उठो सैनिको आज तिरंगा…….
वंदे मातरम
भारत माता की जय.
भारत माता की जय.
….. ‘अनु-प्रिया’
Heart touching poem in Hindi / Best motivational kavita in Hindi
प्रेरणादायक प्रसिद्ध हिंदी कविता
सफलता के मार्ग पर चलते समय, कभी-कभी हमें हालातों के साथ लड़ने की जरूरत होती है, और यदि किसी मोड़ पर विफलता मिल भी जाए तो उसे सिखाने के एक सन्देश के रूप में लेना चाहिए। तभी हम अपने जीवन में उपलब्धियों के आसमान को छू सकते हैं।
Best motivational Poem for students- कुछ कर दिखाऊंगी
आसमां छूकर तेरा अक्श
अपनी उम्मीदों के पंखों से
तेरी श्यामल चादर पर
नाम सुनहरा अपना
टांक आऊंगी।
अपनी उम्मीदों के पंखों से
तेरी श्यामल चादर पर
नाम सुनहरा अपना
टांक आऊंगी।
शैल चूमने तेरी बुलंदी
अपनी हौसलों की सीढ़ी से
हटा बाधाओं के पत्थर भी
गहरी श्वास भरकर
तुझको तांक आऊंगी।
अपनी हौसलों की सीढ़ी से
हटा बाधाओं के पत्थर भी
गहरी श्वास भरकर
तुझको तांक आऊंगी।
सूरज का माना अंगार अपरिमित
झुलसा देगा मेरी देह तेजस्वी
अग्निपुंज की लपटों में जलकर बन मशाल
बुझती चेतना की चिंगारी की लौ
फिर से हांक आऊंगी।
झुलसा देगा मेरी देह तेजस्वी
अग्निपुंज की लपटों में जलकर बन मशाल
बुझती चेतना की चिंगारी की लौ
फिर से हांक आऊंगी।
क्षारित जल भर मेघ लबालब
डरा देंगे गरजकर उरअंतस मेरा
भेदने तेरा चक्रव्यूह शंखनाद कर
आजमाने तेरी ताकत भी ताल
ठोक- ठांक आऊंगी।
डरा देंगे गरजकर उरअंतस मेरा
भेदने तेरा चक्रव्यूह शंखनाद कर
आजमाने तेरी ताकत भी ताल
ठोक- ठांक आऊंगी।
आंधियां भी आएंगी भृकुटी वक्र धर
डिगा देंगी मेरी जुनूनी शिखरों को
रोकने तेरी प्रचंड लहर स्फुरित हो
चंडी बन अहंकार तेरा
सारा फांक जाऊंगी।
डिगा देंगी मेरी जुनूनी शिखरों को
रोकने तेरी प्रचंड लहर स्फुरित हो
चंडी बन अहंकार तेरा
सारा फांक जाऊंगी।
चंचला संग बरसा भी घुमड़-घुमड़
विचलित कर देगी ज्ञान चक्षु मेरे
चपलता की विकलता को फांद उसकी
उत्ताल तरंगों से निकल
किनारा झांक आऊंगी।
विचलित कर देगी ज्ञान चक्षु मेरे
चपलता की विकलता को फांद उसकी
उत्ताल तरंगों से निकल
किनारा झांक आऊंगी।
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
रोकने तेरी प्रचंड लहर स्फुरित हो
चंडी बन अहंकार तेरा
सारा फांक जाऊंगी।
चंडी बन अहंकार तेरा
सारा फांक जाऊंगी।
चंचला संग बरसा भी घुमड़-घुमड़
विचलित कर देगी ज्ञान चक्षु मेरे
चपलता की विकलता को फांद उसकी
उत्ताल तरंगों से निकल
किनारा झांक आऊंगी।
विचलित कर देगी ज्ञान चक्षु मेरे
चपलता की विकलता को फांद उसकी
उत्ताल तरंगों से निकल
किनारा झांक आऊंगी।
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
मैं कुछ कर दिखाऊंगी
Emotional Poem in Hindi
दिल छू लेने वाली कविता हिंदी में (Best Hindi poem on childhood)
बचपन जीवन का सबसे अनमोल समय होता है। यह वह समय होता है जब हम सिर्फ अपनी मस्ती और खुशियों में डूबे रहते हैं। हम दिन-प्रतिदिन कुछ नया सीखते हैं, खेलते हैं, और सपने देखते हैं। खिलौने, मित्र, और परिवार के साथ बिताए गए समय से और महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता । बचपन में हमें न कोई चिंता होती है, न ही कोई ज़िम्मेदारियां। बचपन की यादें हमेशा Tonic का काम करती हैं।
बचपन की यादों पर कविता (चलो टहल आते हैं)
पुरानी गलियों में जाकर थोड़ा टहल आते हैं
फुर्सत के चंद लम्हे हैं, चलो कुछ बहल आते हैं।
फुर्सत के चंद लम्हे हैं, चलो कुछ बहल आते हैं।
वह पकड़म-पकड़ाई, गुल्ली-डंडा, खो-खो का खेल
वो छुपन-छुपाई, हल्ला-गुल्ला, हमारी छुक- छुक करती रेल
यादों के झरोखों से झांक फिर से कुछ कर पहल आते हैं।
चलो,पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वो छुपन-छुपाई, हल्ला-गुल्ला, हमारी छुक- छुक करती रेल
यादों के झरोखों से झांक फिर से कुछ कर पहल आते हैं।
चलो,पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वो बारिश के पानी में कागज की कश्ती
वह कटती पतंगे, गुड्डे-गुड़ियों संग मस्ती
सूखी पाती बटोर अपना-अपना फिर से महल बनाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वह कटती पतंगे, गुड्डे-गुड़ियों संग मस्ती
सूखी पाती बटोर अपना-अपना फिर से महल बनाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वो दो पल का झगड़ा, लड़ फिर मुस्कुराना
वो तपती जून दोपहरी आमों पर नजर गड़ाना
छोड़ झमेले दुनियादारी के बच्चे बन मचल जाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वो तपती जून दोपहरी आमों पर नजर गड़ाना
छोड़ झमेले दुनियादारी के बच्चे बन मचल जाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
वो पापा की डांटें, वो मम्मी की लोरी
भाई बहनों से तू-तू कभी थोड़ी-थोड़ी
ढूंढ़ बचपन पुराना खुद को थोड़ा बदल आते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
भाई बहनों से तू-तू कभी थोड़ी-थोड़ी
ढूंढ़ बचपन पुराना खुद को थोड़ा बदल आते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
न कल की थी चिंता, न बीते की सतह
न रोने का कारण, न हंसने की वजह
कोई लौटा दे बचपन मेरा, जिस पर आज भी हम पिघल जाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
न रोने का कारण, न हंसने की वजह
कोई लौटा दे बचपन मेरा, जिस पर आज भी हम पिघल जाते हैं।
चलो, पुरानी गलियों में जाकर टहल आते हैं।।
…….. ‘अनु-प्रिया’
Hindi Kavita for new Generation | नई पीढ़ी के बच्चों के लिए प्रेरणादायक कविता
लिव-इन रिलेशनशिप एक साथ रहने का समझौता है, जिसमें दो व्यक्तियों के बीच संबंध होता है बिना शादी के। यह सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, जो समाज में नई सोच को प्रोत्साहित करता है परंतु इसमें कई चुनौतियाँ भी हैं। समाज में इसकी स्वीकृति कम होने के साथ-साथ कहीं न कहीं परिवार के संबंध भी प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा बहुत लोग इसका फायदा उठाकर अपराध करने से भी नहीं हिचकते।
Poem on Live-in-Relationship | लिव इन रिलेशनशिप पर विशेष कविता
तन समर्पित, पर मन विचलित, ये सब प्रचलित हो गया
कुछ ठगा सा, कुछ लुटा सा, जग अचंभित हो गया
रिलेशन में रहते – रहते पहले लव हो जाता था
लिव इन रिलेशनशिप में आकर लव कलंकित हो गया
कुछ ठगा सा, कुछ लुटा सा, जग अचंभित हो गया
रिलेशन में रहते – रहते पहले लव हो जाता था
लिव इन रिलेशनशिप में आकर लव कलंकित हो गया
संस्कार था, मिलन था पहले जिसको परिणयोत्सव कहते थे
होता था परिवार सम्मिलित, सुख-दुख संग-संग
सहते थे
बलखाते हिलकोर मारते दिल पुलकित हो जाता था
नई पीढ़ी के नखरों से सारा नियम विवर्जित हो गया ।
लिव इन………..
होता था परिवार सम्मिलित, सुख-दुख संग-संग
सहते थे
बलखाते हिलकोर मारते दिल पुलकित हो जाता था
नई पीढ़ी के नखरों से सारा नियम विवर्जित हो गया ।
लिव इन………..
ढोल मंजीरा ज्यों-ज्यों बजते, त्यों-त्यों रिश्ते बुनते थे
तबले की थापों पर सजकर सुर सितार के बहते थे
शहनाई की गूंजों से समूचा जग टंकित हो जाता था
बदल रही रस्मों को देख के मन आशंकित हो गया
लिव इन……….
तबले की थापों पर सजकर सुर सितार के बहते थे
शहनाई की गूंजों से समूचा जग टंकित हो जाता था
बदल रही रस्मों को देख के मन आशंकित हो गया
लिव इन……….
परिणय के साक्षी बनते थे गौरीशंकर देवगण
अंगीकार हृदय करते थे तब जुड़ता था गठबंधन
संकल्पों से प्रीत रीत सब कुछ अंकित हो जाता था
सीमाओं को लांघ के जोड़ा खुद में चुंबकित हो गया
लिव इन……..
अंगीकार हृदय करते थे तब जुड़ता था गठबंधन
संकल्पों से प्रीत रीत सब कुछ अंकित हो जाता था
सीमाओं को लांघ के जोड़ा खुद में चुंबकित हो गया
लिव इन……..
35 टुकड़ों में बंट जाती आज किसी की लाडली
किसी के सपने चूर हो गए किसी की खुलती बाटली
धुआं साजिशों का उठने पर ही जनसमूह गठित हो जाता था
हाहाकारी खबरों को सुन जन-गण का मन आतंकित हो गया।
लिव इन……..
किसी के सपने चूर हो गए किसी की खुलती बाटली
धुआं साजिशों का उठने पर ही जनसमूह गठित हो जाता था
हाहाकारी खबरों को सुन जन-गण का मन आतंकित हो गया।
लिव इन……..
35 टुकड़े परंपरा के हो गए चकनाचूर कर
आंधी बन उड़ चली हैं नस्लें वर्तमान को लांघकर
संवेदना से कर्तव्यों का रूप प्रतिष्ठित हो जाता था
आज का मानव दानव से भी कुछ ज्यादा कुंठित हो गया
लिव इन……….
आंधी बन उड़ चली हैं नस्लें वर्तमान को लांघकर
संवेदना से कर्तव्यों का रूप प्रतिष्ठित हो जाता था
आज का मानव दानव से भी कुछ ज्यादा कुंठित हो गया
लिव इन……….
आज पलट दो नवयुवकों इस भोगवाद की आंधी को
हे लाड़लियों यही थाम लो अपनी इस आजादी को
वो चिराग बन जिससे देश का हर कोना आलोकित हो जाता था
अमल करोगे मैं समझूंगी लिखना मेरा फलित हो गया
लिव इन………
हे लाड़लियों यही थाम लो अपनी इस आजादी को
वो चिराग बन जिससे देश का हर कोना आलोकित हो जाता था
अमल करोगे मैं समझूंगी लिखना मेरा फलित हो गया
लिव इन………
…… ‘अनु-प्रिया’
Best Hindi Kavita on life – जिंदगी पर कविता
जीवन के प्रत्येक क्षण में, हमारे लिए नई परिस्थितियाँ, नए रिश्ते, और नए-नए अवसर आते रहते हैं। ये परिवर्तन हमें सीखने, बढ़ने, और विकसित होने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से हम अपनी क्षमताओं को निखारते हैं और अपने लक्ष्यों की दिशा में अग्रसर होते हैं।
Poem on Change in Life – परिवर्तन
कोई ईश्वर-प्रदत्त
कोई मानव-निर्मित
आने वाले कल के लिए
परिवर्तन, एक अलंकार, एक कृति
कोई मानव-निर्मित
आने वाले कल के लिए
परिवर्तन, एक अलंकार, एक कृति
नदी का पानी कभी न ठहरा
कल-कल बहता रहता
बचपन, यौवन और बुढ़ापा
चक्र यह चलता रहता
शाश्वत सत्य यही जीवन के
लिखित, सदा संयमित
कल-कल बहता रहता
बचपन, यौवन और बुढ़ापा
चक्र यह चलता रहता
शाश्वत सत्य यही जीवन के
लिखित, सदा संयमित
तरुवर बढ़कर देता छांव
जो कल तक था बीज
जड़-चेतन सब रूप बदलते
क्या मानव, क्या चीज
जीवन का सारा बदलाव
कुछ नियमित, कुछ अनियमित
जो कल तक था बीज
जड़-चेतन सब रूप बदलते
क्या मानव, क्या चीज
जीवन का सारा बदलाव
कुछ नियमित, कुछ अनियमित
जग में यह व्यापक बदलाव
धूप लगे कभी छांव
कुछ को लगे स्पर्श नया यह
कुछ के जड़ गए पांव
इसके हर कण- कण की दृष्टि में
कुछ सम्मति, कुछ आपत्ति
धूप लगे कभी छांव
कुछ को लगे स्पर्श नया यह
कुछ के जड़ गए पांव
इसके हर कण- कण की दृष्टि में
कुछ सम्मति, कुछ आपत्ति
राजनीति, साहित्य, कला हो
हो समाज या कोई विज्ञान
परिवर्तन आधारशिला है
जानो तुम इसका संज्ञान
परंपरा निरंतरता की
कभी पूर्ति, कभी क्षति
हो समाज या कोई विज्ञान
परिवर्तन आधारशिला है
जानो तुम इसका संज्ञान
परंपरा निरंतरता की
कभी पूर्ति, कभी क्षति
……’अनु-प्रिया’
A Beautiful Poem on city in Hindi
शहरों में नगरीकरण के कारण जलवायु परिवर्तन, अव्यवस्थित विकास, सामाजिक मेल-मिलाप की कमी, प्रदूषण,अपर्याप्त अधिकारों की कमी, जनसंख्या की बढ़ती दर, और अव्यवस्थित शहरीकरण जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जो कि गांव से बहुत अलग है। इस कविता में इसी भावना को दर्शाया गया है।
शहर पर कविता- मेरे शहर में
इतना सब सीलबंद है मेरे शहर में
कि बचपन तक नजरबंद है मेरे शहर में।
कि बचपन तक नजरबंद है मेरे शहर में।
अम्मा के चूल्हे से अब उठता नहीं धुंआ
अंगीठी तक नापसंद है मेरे शहर में।
अंगीठी तक नापसंद है मेरे शहर में।
झरने,तालाब,नदियां उफनती है गांव में
बिकता पानी बोतलबंद है मेरे शहर में।
बिकता पानी बोतलबंद है मेरे शहर में।
बाटी-चोखा,दाल-चूरमा सब बीती बातें
पिज्जा,बर्गर ही दिल पसंद है मेरे शहर में।
पिज्जा,बर्गर ही दिल पसंद है मेरे शहर में।
भूल पीपल,नीम तले माटी खेला बचपन
टीवी मोबाइल में बसता आनंद है मेरे शहर में।
टीवी मोबाइल में बसता आनंद है मेरे शहर में।
काला कागा,मोर,पपीहा,जुगनू सब छूटे
चिड़िया तक नहीं स्वच्छंद है मेरे शहर में।
चिड़िया तक नहीं स्वच्छंद है मेरे शहर में।
गुल्लक,चकिया,गुड्डा-गुड़िया मेला से लाना
चरखी डोर पतंग तक बंद है मेरे शहर में।
चरखी डोर पतंग तक बंद है मेरे शहर में।
तिल- लाई लड्डू की भीनी खुशबू के आगे
भाव चढ़ता कलाकंद है मेरे शहर में।
भाव चढ़ता कलाकंद है मेरे शहर में।
इमली,बेल,गन्ने,रसीले आम के चुस्की
मिलता भी नहीं गुलकंद है मेरे शहर में।
मिलता भी नहीं गुलकंद है मेरे शहर में।
दमघोंटू आबोहवा में कैसे हो गुजर बसर
पर हर कोई ख्वाहिशमंद है मेरे शहर में।
पर हर कोई ख्वाहिशमंद है मेरे शहर में।
चमकते-दमकते लोग,बनावटी बातें
बस मतलब के ही संबंध है मेरे शहर में।
बस मतलब के ही संबंध है मेरे शहर में।
रेस्टोरेंट्स,पार्क,क्लब में मौज ढूंढते लोग
सच्ची खुशियों पर भी पाबंद है, अनु के शहर में।
सच्ची खुशियों पर भी पाबंद है, अनु के शहर में।
…… ‘अनु-प्रिया’
Love Kavita in Hindi (प्यार पर बहुत ही खूबसूरत कविता हिंदी में)
A Beautiful Love letter poem in Hindi
लव लेटर या चिट्ठी एक मधुर तरीके से अपने प्रेमी या प्रेमिका को अपनी भावनाओं का इजहार करने का एक अच्छा तरीका है। इसमें प्रेम, रोमांस, भावनाओं और संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया जाता है। परंतु कभी-कभी प्रेमी लव लेटर लिखते तो है परंतु उसे देने की हिम्मत नहीं कर पाते। कुछ इन्हीं जज़्बातों को इस कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्यार की चिट्ठी पर कविता (पूछती है )
मेरी अलसाई आंखों से नींद चुरा कर
रोम-रोम महका कर
खुशबू से तर कर
गुदगुदाकर
प्रेम में लिखी गई वह गुलाबी चिट्ठी
मुझमें अंगड़ाई ले पूछती है
रोम-रोम महका कर
खुशबू से तर कर
गुदगुदाकर
प्रेम में लिखी गई वह गुलाबी चिट्ठी
मुझमें अंगड़ाई ले पूछती है
क्यों बयां न कर पाया तू हाल-ए- दिल कभी
उससे,जिस पर मरा करता था कभी
फिर चुपके से कहती है
ख्वाब तेरी आंखों के
सजकर
जज्बात दिल के
प्यार की स्याही में लिपट कर
मुझ पर छप जाया करते थे कभी
गीत बन गुनगुनाते थे कभी
उससे,जिस पर मरा करता था कभी
फिर चुपके से कहती है
ख्वाब तेरी आंखों के
सजकर
जज्बात दिल के
प्यार की स्याही में लिपट कर
मुझ पर छप जाया करते थे कभी
गीत बन गुनगुनाते थे कभी
पर सिमट कर रह गई तेरी मैं प्रेम- पाती
काश! मैं उसके पते पर पहुंच पाती
बनकर रह गई हूं सिर्फ तेरे टूटे दिल का आईना
एक अधूरी प्रेम कहानी का नमूना
अंदर- बाहर किया करूंगी तेरी दराज से
टटोलकर तुझे,पूछती रहूंगी तेरी आज से
काश! मैं उसके पते पर पहुंच पाती
बनकर रह गई हूं सिर्फ तेरे टूटे दिल का आईना
एक अधूरी प्रेम कहानी का नमूना
अंदर- बाहर किया करूंगी तेरी दराज से
टटोलकर तुझे,पूछती रहूंगी तेरी आज से
और समझाती रहूंगी बार-बार
मगर हो बेकरार
कि इश्क विश्क छोड़ो
तुम्हारे बस की बात नहीं।
आशिकी की राह पर चलना
डरपोकों का काम नहीं।।
मगर हो बेकरार
कि इश्क विश्क छोड़ो
तुम्हारे बस की बात नहीं।
आशिकी की राह पर चलना
डरपोकों का काम नहीं।।
….. ‘अनु-प्रिया’
A very Short Poem in Hindi
A VeryShort poem on corona virus
कोरोनावायरस नामक महामारी से भला कौन परिचित नहीं होगा। 2019 में चीन के वुहान शहर से शुरू होकर दुनिया का ऐसा कोई भी देश शायद न हो, जहां इसने अपना प्रकोप न दिखाया हो। उसे दर्दनाक स्थिति का बहुत ही दयनीय चित्रण इस कविता के माध्यम से किया गया है।
कोरोनावायरस पर हिंदी कविता (सवाल उठा नहीं करते)
घुटती सांसों पर यहां सवाल उठा नहीं करते
सड़ती लाशों पर यहां सवाल उठा नहीं करते
सड़ती लाशों पर यहां सवाल उठा नहीं करते
सुना है कि इंसानों की बस्ती बहुत है इसलिए
दो- चार वायरसों पर बवाल उठा नहीं करते
दो- चार वायरसों पर बवाल उठा नहीं करते
चोटों-जख्मों का भी क्या करें साहिब
जब कोई दवा मरहम भी काम नहीं आता
जब कोई दवा मरहम भी काम नहीं आता
जर्रे- जर्रे डूबें हो जब आंखो के पानी से
तो खूनों में भी उबाल उठा नहीं करते
तो खूनों में भी उबाल उठा नहीं करते
….. ‘अनु-प्रिया’
तो दोस्तों! उम्मीद करते हैं कि आपको यह ‘अनु-प्रिया’ द्वारा लिखित Hindi Mein Kavita: 10 बेहतरीन हिंदी कविताएँ जो दिल को छू जाएँ अवश्य ही पसंद आयी होगी। इसमें हमने एक साथ उनकी 10 कविताओं का संग्रह बनाया है। आप हमारी यह पोस्ट अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों के साथ Facebook , Instagram, Twitter, WhatsApp इत्यादि पर साझा कर सकते है, और हमें कमेंट में बता सकते है कि आपको हमारा यह कविताओं का संग्रह कैसा लगा।
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